Wednesday, July 22, 2009

नमस्ते

कुछ नया लिखना चाह रहा हूँ , क्या लिखूं किस बारे मैं लिखूं कुछ समझ नही आ रहा है । हालाँकि बनारस बारे मैं लिखना हो तो topic की कमी नही। अब अपने पूतु को हे लीजये अरे वही जो maidagin के आगे हरतीरथ पर रहते हैं। एक दिन लहुराबीर पर मिल गए । मिलते बात न चीत siidhe मरदे कल दिखत नही हुआ कही bahar गयल रहला काइतने मैं भिर्गु का पान का दुकान आ गई। टपक से पूतु बोले चाचा दू गो पान दिहा साथ में मुझसे भी पूछे बाबू तोहूँ पान लेबा, अब बनरस में रह केर पान न खा बेवकूफी होई कहते हुए पान मेरी तरफ़ बढ़ा दिए। बाहर रहते हुए मैंने पान को मिस किया था इसलिए मैंने भी झट से पान थमा और मुँह मैं दाल लिया। हाँ बाबू का karat हाउ आज कल, मैंने बोला पत्रकार बन गया हूँ, अच्छा त पेपर छापतहुआ ठीक हाउ, इतना सुनते ही मेरा तो चेहरा लाल हो gaya.लेकिन पुत्तु को कुछ बोलना मतलब अपनी सामत मैंने भी सहमती मैं सर h

No comments:

Post a Comment