मैं इस बार काफी दिनों के बाद बनारस गया था. हर बार की ही तरह स्टेशन पर उतरने के साथ ही मन मैं उमंग और दोनों हाथो को कुछ इस तरह फल कर यहाँ की आबो हवा को महसूस किया. प्लात्फोर्म की सिदिहियाँ चढ़ते हुए मैं पग भर रहा था. प्लात्फोर्म नुम्ब्र्र ९ से १ तक पहुचते हुए किसी नेसेदी की तरह ही पान और चैये की तलब मुझा परेसान करने लगी.स्टेशन के भर होते ही मैंने सीधे पेट्रोलपम्प के बगल मैं स्तिथ ची पण की दुकानों की तरफ़ बढ़ चला. बैग रखने के साथ हे मैंने चीय माँगा. और साथ हे एक पान . उधेर से सुना सुनाया सवाल चुना या कथा का . चुना, सदी और तनी सा किमाम. एस दौरान मैं दुकान वाले के हाथो की तेजी देख मुस्कुरा रहा था. मुझे मुस्कुराता देख उसने पूछ का भइया कहे हस्त हाउ. इस सवाल का मेरे पास जब था भी और नही भी. फिर भी मैं कहा कुछ नही तू पान लगाव ऐसे हे बड़े बाद यहाँ अन्ने पर सब पुराणी याद तजा हो रही है. सायद अब तक पान वाला भी समझ गया की मैं खाती बनारसी टाइप का हूँ. पान थमाते हुए मुझसे पुछा कहाँ नौकरी करेला भइया.मैंने बोला जम्मू मैं।
अरे वहां तो बड़ी सर्दी है और आतंकी साला टी नरके काले हौं, मैंने कहा ठंडी तो हाँ लेकिन जम्मू मैं नही कश्मीर मैं. उसने एक लम्बी सनस ले फिर बोला ऐ साला आत्न्कियन से तो रोज़ पला पडत होई मैं बोला के ब्रिजेश और मुख्तार रोज बैखना का उसने बोला नही और उसको इसी के साथ अपने सवाल भी मिल गया था. मैं भी बैग उताह पांडेपुर के लिया ऑटो पकड़ना के लिया चल दिया.
Friday, August 28, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
बहुत दिन बाद लिखे! लिखे जाव!
ReplyDeleteBahut Barhia... IBlog ki dunia me aapka swagat hai...si Tarah Likhte rahiye.
ReplyDeletehttp://hellomithilaa.blogspot.com
Mithilak Gap Maithili Me
http://mastgaane.blogspot.com
Manpasand Gaane
http://muskuraahat.blogspot.com
Aapke Bheje Photo
narayan narayan
ReplyDelete