नमस्ते
कुछ नया लिखना चाह रहा हूँ , क्या लिखूं किस बारे मैं लिखूं कुछ समझ नही आ रहा है । हालाँकि बनारस बारे मैं लिखना हो तो topic की कमी नही। अब अपने पूतु को हे लीजये अरे वही जो maidagin के आगे हरतीरथ पर रहते हैं। एक दिन लहुराबीर पर मिल गए । मिलते बात न चीत siidhe मरदे कल दिखत नही हुआ कही bahar गयल रहला काइतने मैं भिर्गु का पान का दुकान आ गई। टपक से पूतु बोले चाचा दू गो पान दिहा साथ में मुझसे भी पूछे बाबू तोहूँ पान लेबा, अब बनरस में रह केर पान न खा त बेवकूफी होई कहते हुए पान मेरी तरफ़ बढ़ा दिए। बाहर रहते हुए मैंने पान को मिस किया था इसलिए मैंने भी झट से पान थमा और मुँह मैं दाल लिया। हाँ बाबू का karat हाउ आज कल, मैंने बोला पत्रकार बन गया हूँ, अच्छा त पेपर छापतहुआ ठीक हाउ, इतना सुनते ही मेरा तो चेहरा लाल हो gaya.लेकिन पुत्तु को कुछ बोलना मतलब अपनी सामत मैंने भी सहमती मैं सर h
Wednesday, July 22, 2009
बनारस के घाट पर सूर्य ग्रहण पर जो appadhapi मची वह दुखदाई है। दिल से मैं मृत महिला के लिए प्रयेर करूंगा की उसकी आत्मा को शान्ति मिले। इस पावन मौके पर किसे का मरना वह भी तब जब वह धरम करम करने आई हो तो दुःख होता है, लेकिन इस नियती मान कर चुप बैठे sउरक्षा को जिम्मेदार माने। हलाँकि इस नगरी को मोक्ष की नगरी माना जाता है, लुक्क उसका जो यहाँ आकर अपने प्राण त्याग्ये। लेकिन इस तरह से तो मोक्ष नही मिल सकता, sउरक्षा key लिए जिम्मेदार हैं।
Sunday, July 5, 2009
Friday, July 3, 2009
बनारसी भाइयों को मेरा नमस्कार
सभी बनारसी भाइयों को मेरा सप्रेम नमस्कार* *इस ब्लॉग को कामयाब बनाने के लिए आप सभी के सहयोग की अपेक्षा करता हूँ और उम्मीद करता की आप अपना बहुमूल्य समय देने का कष्ट करेंगे * *आपका भाई * *पवन बनारसी * **
महादेब की नगरी
महादेव इस ब्लॉग के जरिये मैं आप लोग से मुखातिब हो रहा हूँ कोशिश है बनारस की मस्ती और अल्लहड़ पन आप सब कर सकूं पवन सिंह
का गुरु कहाँ जात हुआ
का गुरु कहाँ जात हुआ; इन सब्दओं की मिठास जब तक मैं बनारस मैं था कभी नही समझ सका था यहाँ से भर निकलने का बाद yअहन की याब मुझे बर्बखत आती है nजब से बहार निकला यही सोचता हूँ की आख़िर बनारस main aakhir banaras...
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